Posts

Showing posts with the label Adnan Pratapgarhi
ADVERTISEMENT

हश्र में फिर मिलेंगे मेरे दोस्तो / Hashr Mein Phir Milenge Mere Dosto

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है मक़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है पयाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! कहना सब जीते-जी के हैं शिकवे-गिले आज से ख़त्म दुनिया के सब सिलसिले शम'अ ढलने को है, दम निकलने को है अब है क़िस्सा तमाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! मुझ को नहला के पहना दिए हैं कफ़न रो चुके मिल के माँ-बाप भाई-बहन मौत भी, दोस्तो ! आज हैरत में है हो चुका एहतिमाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! ख़ुश्बुओं में कफ़न को बसाने लगे मेरी मय्यत को दुल्हन बनाने लगे दोस्तो ! अब उठाओ जनाज़ा मेरा हो चुका इंतिज़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! मुझ को ज़ेर-ए-ज़मीं लोग दफ़ना गए किस-क़दर संग-दिल हो के फ़रमा गए दोस्तो ! चैन की नींद सोते रहो बस यही है मक़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! कैसी दुनिया है, यारो ! ग़ज़ब रे ग़ज़ब चंद दिनों में यहाँ भूल जाते हैं सब जिस बहाने मेरी याद आ जाए तो पढ़ना तुम ये कलाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है मक़ाम आख़री आख़री ...

मेरे दिल में बसा है प्यार मदीने वाले का / Mere Dil Mein Basa Hai Pyar Madine Wale Ka

मेरे दिल में बसा है प्यार मदीने वाले का मैं बन जाऊँ बीमार मदीने वाले का मेरे दिल में बसा है प्यार मदीने वाले का है नूरानी दरबार मदीने वाले का वल्लैल उन की ज़ुल्फ़ें, वश्शम्स उन का चेहरा उन्हें रब ने बनाया ऐसा, नहीं कोई उन के जैसा नहीं कोई जवाब है यार मदीने वाले का क्यूँकर लगे न हर-दम अख़्तर रज़ा का ना'रा जिस ने 'अदू-ए-दीं को तेग़-ए-रज़ा से मारा जब आया नज़र ग़द्दार मदीने वाले का ग़ौस-उल-वरा के प्यारे ! दामन को मेरे भर दो मर्द-ए-मुजाहिद ! मुझ पर चश्म-ए-'इनायत कर दो दे दो सदक़ा सरकार मदीने वाले का चाहत न हो जन्नत की, हो 'ईद हर हसरत की जागे नसीबा सब का, मे'राज हो क़िस्मत की हो जाए गर दीदार मदीने वाले का सुन, ऐ हकीम-ए-दौरा ! हमदर्द मेरे मेहरबाँ जाएगी तेरी सारी हिकमत यहाँ राएगाँ मैं दिल से हूँ बीमार मदीने वाले का हासिल उसे ही होगी दुनिया की सरफ़राज़ी मौला-ए-दो-जहाँ भी होगा उसी से राज़ी अपना ले जो किरदार मदीने वाले का बोले बिलाल-ए-हब्शी, ज़ालिम ! ये सितम है कैसा 'इश्क़-ए-नबी में काँटा लगता है फूलों जैसा हूँ जब से मैं बीमार मदीने वाले का जिब्रील तो 'आजिज़ ह...

ख़िदमत अम्मी अब्बू की / Khidmat Ammi Abbu Ki | Adnan Pratapgarhi

ख़िदमत अम्मी-अब्बू की, ख़िदमत अम्मी-अब्बू की सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की होटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की भाग रहा है क्यूँ, ऐ नादाँ ! इक दिन तू पछताएगा ख़्वाहिश-ए-दुनिया लाख बड़ा ले लेकिन कुछ न पाएगा जन्नत में ले कर के जाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की होटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की उस के सर की 'अज़मत क्या है ! तल्वा जिन का आ'ला है रोज़-ए-महशर देखना उन का रुत्बा कितना आ'ला है अल्लाह से बख़्शिश करवाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की होटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की रहमत वाली नूरी चादर उस के सर पर रहती है दोनों जहाँ की ने'मत उस के बाम-ओ-दर पर रहती है जिन के हक़ में ने'मत आए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की होटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की जौहरी जैसे सोने-चाँदी की हर क़ीमत जाने है फ़रमा...

फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से आया रहमत का बन के साया | रमज़ान का महीना / Fazl-e-Khuda Se Aaya Rehmat Ka Ban Ke Saya | Ramzan Ka Mahina

फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से आया, रहमत का बन के साया रमज़ान का महीना, रमज़ान का महीना ने'मत दिलाए रब से, जन्नत दिलाए रब से बख़्शिश का है ख़ज़ीना, रमज़ान का महीना क़ुरआँ की आयतों को पढ़ती फ़ज़ा-ए-हर-सू घर-घर से आ रही है इफ़्तारियों की ख़ुश्बू सज्दों में सर सभी के, रौनक़ है मस्जिदों में है महफ़िल-ए-शबीना, रमज़ान का महीना कितना हसीन-ओ-अफ़ज़ल रब ने बनाया रमज़ाँ मोमिन मचल रहा है, सर पीटता है शैताँ बस रब की बंदगी है, क्या ख़ूब ज़िंदगी है सिखला रहा है जीना, रमज़ान का महीना रब की रज़ा में रोज़ा रखने को नन्हे-मुन्ने ज़िद कर रहे हैं माँ से कहीं रोज़े-दार बच्चे इस बार हम भी रोज़ा रखेंगे सुन ले, ऐ माँ ! आया जो हसीं महीना, रमज़ान का महीना क़ुरआन जैसी बोली रख देगा हर ज़बाँ में रमज़ान ले के आया पैग़ाम ये जहाँ में बुग़्ज़-ओ-हसद मिटा दो, बस रब से लौ लगा लो किसी से न रखो कीना, रमज़ान का महीना शायर: दिलशाद दिल सिकंदरपुरी ना'त-ख़्वाँ: अदनान प्रतापगढ़ी fazl-e-KHuda se aaya, rehmat ka ban ke saaya ramzaan ka mahina, ramzaan ka mahina ne'mat dilaae rab se, jannat dilaae rab se baKHshish ka hai KHazeena, ra...

दुनिया नबी नबी बोले | क़लम उठाऊँ तो मिस्रा नबी नबी बोले / Duniya Nabi Nabi Bole | Qalam Uthaun To Misra Nabi Nabi Bole

क़लम उठाऊँ तो मिस्रा' नबी नबी बोले पढ़ूँ जो ना'त तो दुनिया नबी नबी बोले दु'आ हुज़ूर जो बंजर ज़मीं पे फ़रमा दें ज़मीं को चीर के पौधा नबी नबी बोले क़सम ख़ुदा की, वो जिस सिम्त से गुज़र जाएँ क़दम को चूम के रस्ता नबी नबी बोले सुलगती रेत पर, हर ज़ुल्म और सितम सह कर बिलाल मेरे नबी का नबी नबी बोले फ़क़त हुज़ूर के, ऐसा नहीं कोई जिस को बुला के 'अर्श पे मौला नबी नबी बोले अमीर हम्ज़ा चचा भी उहुद के मैदाँ में लुटा के अपना कलेजा नबी नबी बोले नबी के नाम का ना'रा लगा के महफ़िल में नबी का चाहने वाला नबी नबी बोले ना'त-ख़्वाँ: अदनान प्रतापगढ़ी qalam uThaau.n to misra' nabi nabi bole pa.Dhu.n jo naa't to duniya nabi nabi bole du'aa huzoor jo banjar zamee.n pe farma de.n zamee.n ko cheer ke paudha nabi nabi bole qasam KHuda ki, wo jis simt se guzar jaae.n qadam ko choom ke rasta nabi nabi bole sulagti ret par, har zulm aur sitam seh kar bilaal mere nabi ka nabi nabi bole faqat huzoor ke, aisa nahi.n koi jis ko bula ke 'arsh pe maula nabi nabi b...

तयबा बुलाना आक़ा तयबा बुलाना / Tayba Bulana Aaqa Tayba Bulana | Taiba Bulana Aaqa Taiba Bulana

तयबा बुलाना, आक़ा ! तयबा बुलाना तयबा बुला के दिल की हसरत मिटाना सुब्ह और शाम लूँगा, तेरा प्यारा नाम लूँगा क़ब्र में, आक़ा ! तेरे दामन को थाम लूँगा ऐसी घड़ी में रुख़ से पर्दा हटाना जल्वा दिखाना, आक़ा ! जल्वा दिखाना तेरा जब दीदार होगा, दिल को क़रार होगा तेरे ही करम से, आक़ा ! बेड़ा सब का पार होगा 'ऐब हमारे अपने दामन में छुपाना बख़्शिश कराना, आक़ा ! बख़्शिश कराना रहमत है, नूर है, कैफ़ है, सुरूर है जल्से में देखो, यारो ! जल्वा-ए-हुज़ूर है नूरानी जल्सा है ये कितना सुहाना नबी का दीवाना सब हैं नबी का दीवाना या इलाही ! मेरी ये इल्तिजा क़ुबूल हो सब की लहद में, यारो ! जल्वा-ए-रसूल हो देखूँगा जी भर के उन का मुस्कुराना अपना बनाना, आक़ा ! अपना बनाना ना'त-ख़्वाँ: सज्जाद निज़ामी अदनान प्रतापगढ़ी tayba bulaana, aaqa ! tayba bulaana tayba bula ke dil ki hasrat miTaana subh aur shaam lunga, tera pyaara naam lunga qabr me.n, aaqa ! tere daaman ko thaam lunga aisi gha.Di me.n ruKH se parda haTaana jalwa dikhaana, aaqa ! jalwa dikhaana tera jab deedaar hoga, dil ko qaraar hoga te...